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एक साँस आजादी के ( डॉ. जीवन यदु ) A breath of freedom (Dr. Jeevan Yadu)

जीयत-जागत मनखे बर जे धरम बरोबर होथे। एक साँस आजादी के, सौ जनम बरोबर होथे।

जेकर चेथी म जूड़ा कस माड़े रथे गुलामी, जेन जोहारे बइरी मन ल. घोलंड के लामालामी, नॉव ले जादा, जग म ओकर होथे ग बदनामी, अइसन मनखे के जिनगी बेसरम बरोबर होथे।

लहू के नदिया तउँर निकलये, बीर ह जतके बेरा, सुरुज निकलथे मेंट के करिया बादरवाला घेरा, उजियारी ले तभे उसलये अँधियारी के डेरा, सबै परानी बर आजादी करम बरोबर होथे।

जेला नइ हे आजादी के एकोकनी चिन्हारी, पर के कोठा के बइला मन चरथे ओकर बारी,

आजादी के बासी आगू बिरथा सोनहा थारी, सोन के पिंजरा म आजादी भरम बरोबर होथे।

माढ़े पानी ह नइ गावय खलबल खलबल गाना, बिना नहर उपजाय न बाँधा खेत म एको दाना, अपन गोड़ के बँधना छोरय ओला मिलय ठिकाना, आजादी ह सब बिकास के मरम बरोबर होथे।


अभ्यास


 पाठ से 

1. आजादी के एक साँस काकर बरोबर होथे?

उत्तर-

2. अँधियारी के डेरा कब उसलथे?

उत्तर-

3. “माढ़े पानी ह नइ गावय खलबल-खलबल गाना कवि के अइसे कहे के मतलब का हे?

उत्तर-

4. “लहू के तरिया ल तउर के कोन निकलथे।

उत्तर-

5. संसार म कोन मनखे के बदनामी होथे?

उत्तर-

6. कवि ह आजादी ल जम्मो विकास के जर काबर कहे हे?

उत्तर-

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