हिंदी छत्तीसगढ़ भारती

ब्रज-माधुरी ( कविवर पद्माकर / हरिश्चंद्र / बेनी ) Braj-Madhuri (Poet Padmakar / Harishchandra / Beni)

चितै-चितै चारों ओर चौंकि-चौंकि परै त्योंही, जहाँ-तहाँ जब-तब खटकत पात है। भाजन सो चाहत, गँवार ग्वालिनी के कछु, डरनि डराने से उठाने रोम गात हैं। कहँ पदमाकर सुदेखि दसा मोहन की, सेष हू, महेस हू, सुरेस हू सिहात हैं। एक पाँय भीत, एक पाँय मीत काँधे घरें, एक हाथ छींकौ एक हाथ दधि खात हैं। 1।।

– पद्माकर

पंकज कोस में भृंग फस्यौ, करतौ अपने मन यो मनसूबा होइगो प्रात उएँगे दिवाकर, जाउँगो धाम पराग लै खूबा ।। ‘बेनी’ सो बीच ही और भई नहिं काल को ध्यान न जान अजूबा । आय गयंद चबाय लियौ, रहिगो मन-ही-मन यो मनसूबा ।। 2 ।।

– बेनी

सखी हम काह करें कित जायें। बिनु देखे वह मोहिनी मूरति नैना नाहिं अघायें।। बैठत उठत सयन सोवत निस चलत फिरत सब ठौर। नैनन ते वह रूप रसीलो टरत न इक पल और। सुमिरन वही ध्यान उनको ही मुख में उनको नाम । दूजी और नाहिं गति मेरी बिनु मोहन घनश्याम सब ब्रज बरजौ परिजन खीझौ हमरे तो अति प्रान। हरीचन्द्र हम मगन प्रेम-रस सूझत नाहिं न आन।। 3 ।।

-भारतेंदु


अभ्यास


पाठ से

1. चितै-चितै चारो ओर इस छंद में कौन बार-बार चौककर इधर-उधर देख रहा है और क्यों?

उत्तर-

2. कमल में भौरा कैसे बंद हो गया ?

उत्तर-

3. कमल कोष में बंद भौंरा मन ही मन क्या सोच रहा था ?

उत्तर-

4. भौरे की इच्छाओं का अंत कैसे हुआ ?

उत्तर-

5. नैन अघाने का क्या आशय है ?

उत्तर-

6. नायिका अपनी सखी से मन की किन दुविधाओं का उल्लेख करती है ?

उत्तर-

7. भाव स्पष्ट कीजिए

सुमिरन वही ध्यान उनको ही मुख में उनको नाम । दूजी और नाहिं गति मेरी बिनु मोहन घनश्याम ।।

उत्तर-

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