हिंदी छत्तीसगढ़ भारती

Hindi Chhattisgarh Bharti

  • हिरोशिमा की पीड़ा ( श्री अटल बिहारी वाजपेयी ) The Pain of Hiroshima (Shri Atal Bihari Vajpayee)

    किसी रात को मेरी नींद अचानक उचट जाती है. आँख खुल जाती है, मैं सोचने लगता हूँ कि जिन वैज्ञानिकों ने अणु अस्त्रों का भीषण नरसंहार के समाचार सुनकर आविष्कार किया था: वे हिरोशिमा नागासाकी के रात को सोए कैसे होंगे ? दाँत में फंसा तिनका, आँख की किरकिरी, पाँव…

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  • सिखावन (दोहा) Teaching (Doha)

    का होंगे के रात हे घपटे हे अँधियार । आसा अउ बिसवास के चल तैं दीया बार। एके अवगुन सौ गुन ल मिलखी मारत खाय। गुरतुर गुन वाला सुवा, लोभ करे फँद जाय। मीठ-लबारी बोल के लबरा पाये मान । पन सतवंता ह सत्त बर हौसत तजे परान। घाम छाँव…

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  • मिनी महात्मा ( श्री आलम शाह खान ) Mini Mahatma (Shri Alam Shah Khan)

    बात जरा-सी थी पर मोहन था कि रोए चला जा रहा था। लोग समझा-समझाकर थक गए कि बड़े छोटों को पीटते चले आए हैं. अगर पुलिस अंकल ने उसके एक चपत लगा भी दी तो क्या हो गया? कौन सा पहाड़ टूट पड़ा उस पर? बड़े हैं, पड़ोसी हैं प्यार…

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  • कटुक वचन मत बोल ( श्री रामेश्वर दयाल दुबे ) Do not speak harsh words (Shri Rameshwar Dayal Dubey)

    दास प्रथा के दिनों में एक मालिक के पास अनेक गुलाम थे, जिनमें एक था लुकमान । तुकमान था तो गुलाम, किन्तु वह बड़ा बुद्धिमान था। उसकी प्रशंसा इधर-उधर फैलने लगी। एक दिन उसके मालिक ने उसे बुलाया और कहा- “सुनते हैं, तुम बहुत होशियार हो। मैं तुम्हारा इम्तहान लूँगा।…

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  • ब्रज-माधुरी ( कविवर पद्माकर / हरिश्चंद्र / बेनी ) Braj-Madhuri (Poet Padmakar / Harishchandra / Beni)

    चितै-चितै चारों ओर चौंकि-चौंकि परै त्योंही, जहाँ-तहाँ जब-तब खटकत पात है। भाजन सो चाहत, गँवार ग्वालिनी के कछु, डरनि डराने से उठाने रोम गात हैं। कहँ पदमाकर सुदेखि दसा मोहन की, सेष हू, महेस हू, सुरेस हू सिहात हैं। एक पाँय भीत, एक पाँय मीत काँधे घरें, एक हाथ छींकौ…

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  • तृतीय लिंग का बोध sense of third gender

    इस काल के संबंध में जो तथ्य मिलते हैं यद्यपि उसका ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है फिर भी प्राचीन पौराणिक कथाओं के माध्यम से यह जानकारी जरूर मिलती है कि इस काल में लोग इस समुदाय के प्रति काफी सकारात्मक थे। इस काल की कथाओं में तृतीय लिंग समुदाय के पात्र…

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  • बरसात के पानी ले भू-जल संग्रहण Ground water harvesting by taking rain water

    धरती के बनावट कुछ अइसे है के ओ म कई परत के चटटान हवय। कुछ पानी सोखने वाला अउ भुरभुरी है अउ कुछ तो अतका ठोस हैं के ओमा पानी पार नई जा सकय जब बरसात होथे तब बहुत अकन पानी ह बोहाके नदिया-नरवा म चल देथे फेर कुछ पानी…

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  • मनुज को खोज निकालो ( श्री सुमित्रानंदन पंत ) Find Manuj (Shri Sumitranandan Pant)

    आज मनुज को खोज निकालो। जाति, वर्ण, संस्कृति, समाज से. मूल व्यक्ति को फिर से चालो। देश-राष्ट्र के विविध भेद हर, धर्म-नीतियों में समत्व भर, रूदि-रीति गत विश्वासों की अंध- यवनिका आज उठा लो। आज मनुज को खोज निकालो। भाषा-भूषा के जो भीतर, श्रेणि-वर्ग से मानव ऊपर, अखिल अवनि में…

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  • आतिथ्य ( श्री भदंत आनंद कौशल्यायन ) Hospitality (Shri Bhadant Anand Kaushalyayan)

    जैसे जीवन पथ पर, वैसे ही साधारण सड़क पर आदमी के लिए अकेले चलना कठिन है। कोई ठहरकर किसी पीछे आनेवाले का साथी हो लेता है, कोई चार कदम तेज चलकर आगे जानेवाले का। लेकिन मुझे उस दिन किसी को आवाज देने की भी फुर्सत नहीं थी। किसी साथी की…

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  • अपन चीज के पीरा ( संकलित ) Apne Cheese Ke Pira (Compiled)

    परसराम के जस नाम तस काम जेन मेर नहीं, तेन मेर लाठी अँटियाथे अउ बात-बात म अँगरा उगलथे। सोज गोठियाय ल तो जानय नहीं जुच्छा अटेलही मारथे। परसराम जेन लहो लेथे तेन तो लेथे, ओकर ले जादा लहो लेथे ओकर गाय गोदवरी परसराम करा कोरी भर गाय हे फेर गोदवरी…

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