मनोरमा कक्षा 8वीं

मङ्गलकामना good luck

● प्रभो! देश-रक्षा-बलं में प्रयच्छ । नमस्तेऽस्तु देवेश! बुद्धिं च यच्छ। सुतास्ते वयं शूर वीराः भवाम । गुरून् मातरं चापि तातं नमाम ।।

घृणायास्तु नाशः सदैक्यस्य वासः । भवेद् भारते स्नेहवृत्तेर्विकासः ।। प्रजातान्त्रिक राज्यमस्माकमत्र । सदा वर्धता मङ्गलपत्र तंत्र 11

न कोऽपि क्षुधा-पीडितो मानवः स्यात् ।

न रुग्णोन नग्नो न क्षीणश्च तस्मात् ।।

न शिक्षा-विहीनञ्च पश्याम कञ्चित् ।

प्रभो! भारतस्योन्नति स्यात् कथञ्चित् ।।

सुखै पूर्णमेतद् भवेद् भारतं मे । भवेदन नित्यं प्रभोऽनुग्रहस्ते ।।

इयं कामना प्रार्थनैषा विधातः। इमा पूरपैकाम् अये लोकमातः ।।


शब्दार्थाः


मे = मेरा मुझे ते = तेरा, तेरे लिए तातम् पिता को सुता पुत्र-पुत्रियाँ स्नेहवृते प्रेमभाव का ऐक्यस्य = एकता का वर्धता बढ़े। प्रजातान्त्रिकम् = जनता का इयम् = यह कथञ्चित् = किसी तरह लोकमाता = संसार की माता ।


अर्थ


(1) हे प्रभो! मुझे देश की रक्षा करने का बल दो। हे देवेश! आपको नमस्कार है, आप मुझे बुद्धि प्रदान करें हम सभी आपके पुत्र-पुत्रियाँ, पराक्रमी बने गुरु माता और पिता को नमस्कार करते हैं।

(2) घृणा का नाश हो, हमेशा एकता का वास हो। भारत में सदा प्रेमभाव का विकास हो। हमारा यह राज्य प्रजातान्त्रिक (जनता का) है। यहाँ सर्वत्र हमेशा मंगल (खुशहाली) बढ़ता रहे।

(3) यहाँ कोई भी व्यक्ति भूख से पीड़ित न हो। यहाँ कोई रोगी, वस्त्रविहीन और निर्धन न हो। और कोई यहाँ निरक्षर न होवे हे प्रभु! किसी भी तरह भारत की उन्नति हो।

(4) मेरा भारत सुखों से परिपूर्ण होवे हे प्रभु! आपकी कृपा यहाँ हमेशा होती रहे। हे विधाता! आपसे यही कामना है, यही प्रार्थना है। हे लोकमाता! हमारी इस कामना को पूर्ण करें।


अभ्यासप्रश्नाः


(1) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-


(क) प्रथमे श्लोके कः प्रार्थ्यते ?

उत्तर– प्रथमे श्लोक देशमुक्त्त: प्रथम रोक में देशभक्त प्रार्थना करता है।

(ख) भारत में कीदृशं भवेत् ?

उत्तर– भारत में सूखे पूर्ण भवेता ? मेरा भारत सुखों से परिपूर्ण हो ।

(ग) भारतस्य सुताः कीदृशाः भवेयुः ?

उत्तर– भारतस्य सुताः शूर – वीरा: भपेयुः भारत के पुत्र शूखीर हो

(घ) अस्माक राज्य कीदृशमस्ति ?

उत्तर– अस्मकि राज्यं प्रजातांत्रिकम अन्ति। हमार राज्य प्रजातांधिक है।

(ङ) नरः कया पीडितो न भवेत् ?

उत्तर– घर: क्षुधा पीडितों न भवेत । मनुष्य भूख से पीड़ित न हो।


(2) संस्कृत में अनुवाद कीजिए :-


(क) तेरे पुत्र सदा सुखी रहें।

उत्तर– ते सुतःसहा सुखिन: भवन्तु

(ख) भारत में कोई शिक्षा से रहित न हो।

उत्तर– भारत कोडपि शिक्षा विहीन, म भवेद

(ग) मनुष्य को तुम भोजन दो।

उत्तर– नराय स्वम भोजनं देहि

(घ) हम गुरुओं को प्रणाम करें।

उत्तर– पये गुरुम प्रणामन।

(ड.) सब सुखी हों।

उत्तर– सर्वे सुखिनः भक्तु ।

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