मनोरमा कक्षा 8वीं

मङ्गलाचरणम् Mangalacharanam

वीणाधरे विपुलमङ्गलदानशीले

भक्तार्तिनाशिनि विरञ्चिहरीशवन्थे।

कीर्तिप्रदेऽखिलमनोरथदे महाई

विद्याप्रदायिनि सरस्वति नौमिनित्यम् ।।

श्वेताब्जपूर्णविमलासनसंस्थिते है!

श्वेताम्बरावृत्तमनोहरमञ्जुगात्रे।

उद्यन्मनोक्षसितपटमञ्जुलास्ये

विद्याप्रदायिनि सरस्वति नौमि नित्यम्।।


शब्दार्थाः


वीणाघरे = वीणा धारण करने वाली।

विपुलमङ्गलम् = अपारमङ्गल।

भक्तार्तिनाशिनि = भक्तों के दुःख को नाश करने वाली।

विरञ्चिहरीशवन्द्ये = ब्रह्मा, विष्णु और शिव से वन्दित ।

कीर्तिः = यश

मनोरथदे महाहें = मनोरथ देने वाली मनोरथपूर्ण करने वाली।

महाहें = पूज्यवरा ।

नौमि = प्रणाम करता हूँ।

श्वेताब्ज = श्वेत कमल

संस्थिते = विराजने वाली।

श्वेताम्बरा = श्वेत वस्त्र धारण करने वाली।


अर्थ


  1. हे वीणाधारण करने वाली अपारमङ्गल देने वाली भक्तों के दुःख को नाश करने वाली, ब्रह्मा, विष्णु और शिव से वन्दित होने वाली, कीर्ति तथा मनोरथ देने वाली पूज्यवरा और विद्या देने वाली सरस्वती! आपको नित्य प्रणाम करता हूँ।
  2. हे श्वेत कमलों से भरे हुए निर्मल आसन पर विराजने वाली, श्वेत वस्त्रों से ढके सुन्दर शरीर वाली खिले हुए सुन्दर श्वेत कमल के समान मञ्जुलमुख वाली और विद्या देने वाली सरस्वती! आपको नित्य प्रणाम करता हूँ।

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