हिंदी छत्तीसगढ़ भारती

हमारा छत्तीसगढ़ ( श्री लखनलाल गुप्ता ) Our Chhattisgarh (Shri Lakhanlal Gupta)

उच्च गिरि कानन से संयुक्त भव्य भारत का अनुपम अंश जहाँ था करता शासन सुभग, वीर गर्वित गोंडों का वंश।। नर्मदा, महानदी, शिवनाथ आदि सरिताएँ पूत ललाम प्रवाहित होती, कलकल नाद, हमारा छत्तिसगढ़ अभिराम ।।

रत्नपुर करता गौरव प्रकट, सुयश गाता प्राचीन मलार नित्य उन्नति-अवनति का दृश्य देखता दलहा खड़ा उदार।। तीर्थथल राजिम परम पुनीत, और शिवरीनारायण धन्य कह रहे महानदी तट सतत, यहाँ की धर्म कथाएँ रम्य ।।

प्रकृति का क्रीडास्थल कमनीय यहाँ है वन-संपदा अपार भूमि में भरा हुआ है विपुल, कोयले-लोहे का भंडार ।। यहाँ का है सुंदर साहित्य, हुए हैं बड़े-बड़े विद्वान कीर्ति है जिनकी व्याप्त विशेष आज भी हैं पाते सम्मान ।। कौन कहता यह पिछड़ा हुआ? अग्रसर है उन्नति की ओर । कटोरा यही धान का कलित चाहते सभी कृपादृग कोर ।। नहीं यह कभी किसी से न्यून, अन्न दे करता है उपकार उर्वरा इसकी पावन भूमि अन्न उपजाती विविध प्रकार।। ईश से विनय यही करबद्ध प्रगति पथ पर होवे गतिमान हमारा छत्तीसगढ़ सुख धाम, करें सादर इसका गुणगान ।।


अभ्यास


पाठ से

1. किन-किन नदियों के कलकल नाद से छत्तीसगढ़ अभिराम बनता है ?

उत्तर-

2. कविता के सन्दर्भ में यह राज्य किस प्रकार उन्नति की ओर अग्रसर है ?

उत्तर-

3. कवि का ईश्वर से करबद्ध विनय क्या और क्यों है ?

उत्तर-

4. हमारा छत्तीसगढ़ किन-किन संपदाओं से परिपूर्ण है ?

उत्तर-

5. कविता की पंक्ति कृपादृग कोर के द्वारा कवि किन भावों को व्यक्त करना चाहता है ?

उत्तर-

6. भव्य भारत का अनुपम अंश कवि ने किसे और क्यों कहा है ?

उत्तर-

7. छत्तीसगढ़ की यह भूमि, हम पर किस प्रकार उपकार करती है?

उत्तर-

8. महानदी का तट क्यों प्रसिद्ध है?

उत्तर-

9. कवि ने ईश्वर से क्या प्रार्थना की है?

उत्तर-

10. कवि ने छत्तीसगढ़ को प्रकृति का कमनीय क्रीड़ा स्थल क्यों कहा है?

उत्तर-

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