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पचराही ( लेखक मंडल )

छत्तीसगढ़ के धरती ह कला-संस्कृति बर जगजाहिर हे। इहाँ कतको ठउर म तइहा जुग के मंदिर किला महल खड़े हवय कलकोन मंदिर मन जस के तस हैं त कतको ह खंडहर रूप म राजिम, शिवरीनारायण, सिरपुर, मल्हार, ताला, रतनपुर, डीपाडीह, भोरमदेव, घटियारी, बारसूर दंतेवाड़ा हमर कला-संस्कृति के अगासदिया ऑय, जेकर अंजोर दुनिया म बगरत है। पुरातत्व अउ कला-संस्कृति के नवा ठउर कबीरधाम जिला म पचराही म मिले हे पुरातत्व जगत म एकर गजब सोर उड़त है।

पचराही, छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिला मुख्यालय ले भंडार बाजू म लगभग 45 कि.मी. दुरिहा हॉप नदिया के तीर म मैकल पर्वत के कोरा म बसे हे पचराही ह नानकुन गाँव आय सियान मन कहिथें के इहाँ ले पाँच राह माने रस्ता रतनपुर मंडला, सहसपुर, भोरमदेव (चौरागढ़), अउ लैंजिका (लॉजी) बर निकले हैं। तेकर सेती एकर नाँव पचराही परे है। कतको के अइसन घलो कहना है, के इहाँ कंकाली मंदिर रहिस हे, जेन ह देवी के रूप आय त इहाँ पचरा गीत गाए जाय, तेकर सेती एकर नाव पचराही धराय है। पचराही के नाव चाहे कोनो अधार म धराय होय, फेर ए ह तइहा जुग म वैपार के बड़े भारी केन्द्र रहिस है। आज इहाँ के खंडहर ले मिले तइहा जुग के जिनिस मन अपन कहानी सैंऊहें कहत हैं।

नगर बसाहट के खंडहर के संग इहाँ वैष्णव, शाक्त, अउ जैन धरम ले जुड़े देवी-देवता के मूर्ति अउ मंदिर के जानकारी मिले हे, जेकर निर्माण 9वीं ईस्वी ले 13वीं ईस्वी सदी तक के काल म अनुमानित है। ऐतिहासिक साहित्य म ए क्षेत्र ल पश्चिम-दक्षिण कोसल के नाव ले जाने जात रिहिस प्रदेश बने के बाद इहाँ कुछ ऐतिहासिक ठउर म खोदइ के काम शुरू होइस पुरातत्व खोदइ के बुता ल शासन ह महत्व दिस, जेकर ले नवा प्रदेश के पुरातात्विक अउ सांस्कृतिक तिथिक्रम के नवा झलक मिलना शुरू होगे है।

संचालनालय, संस्कृति एवं पुरातत्व, डहर ले पचराही म बरस 2007 ले खोदइ के काम सरलग चलत है। खोदइ ले प्रागैतिहासिक काल ले मुगल काल तक के अवशेष मिले हे पचराही स्थापत्य अउ शिल्प-कला के बहुत बड़े केन्द्र रहिस हे, जउन ल राजनीतिक स्थायित्व अउ धार्मिक समरसता के प्रतीक माने जा सकत है।

पाछू साल के खोदइ ले दू जलीय प्राणी के जीवाश्म मिले हैं, जेमा ले एक जीवाश्म मौलुस्का (घोंघा ) परिवार के आय अउ दूसर ह पाइला’ परिवार के आय वैज्ञानिक मन के • मुताबिक मौलुस्का जीवाश्म के काल लगभग तेरह करोड़ बरस है। भारत म पहिली बेर खोदइ ले ये जलीय प्राणी के जीवाश्म पचराही में मिले है। एकर सगे संग पचराही म आदिमानव के रहवास घलो रहे हे, जिहा ले उत्तर पाषाण काल अउ मेसोलिथिक काल के बारीक औजार मिले है। हाँप नेंदिया के तीर गाँव बकेला ले गजब अकन जुन्ना पथरा के औजार मिले हे, जेन ह छत्तीसगढ़ के सबसे बड़का जुन्ना पथरा के औजार बनाय के जघा साबित होय हे।

गजब दिन के पाछू सोमवंशी काल म पचराही फेर अबाद होइस इही बेरा म कंकालिन नाव के ठउर म सुरक्षा के हिसाब ले दू ठन परकोटा घेर के मंदिर के निर्माण करे गिस इहाँ खोदइ ले ईंटा के बने मंदिर मिले हे संग म सोमवंशी काल के पार्वती अउ कार्तिक के पट्ट (मूर्ति) घलो मिले है। खोदइ के पहिली ये टीला म सोमवंशी काल के दुवार तोरन अउ कतकोन मूर्ति रखाय

रहिस हे, जेन ह अब खैरागढ़ संग्रहालय म रखाय है। सोमवंशी काल के पाछू पचराही ह कल्चुरी काल म घलो अबाद रहिस, इहाँ ले पहिली बेर कल्चुरी राजा प्रतापमल्ल देव के सोन के सिक्का (मुद्रा) मिले है। दू तन सोन के सिक्का (मुद्रा) रतनदेव के हे। जाजल्लदेव अउ पृथ्वीदेव के घलो चाँदी के सिक्का मिले हैं। कल्चुरी काल के पाहू पचराही उपर फणिनागवंशी राजा मन अपन कब्जा जमा लिन अउ ये ठउर म मंदिर अउ महल बनवाइन। इहाँ ले पहिली बेर फणिनागवंशी राजा कन्हरदेव के सोन के सिक्का मिले है, संगे-संग दूसर अउ फणिनागवंशी राजा जइसे श्रीधरदेव, जसराजदेव के घलो चाँदी के सिक्का मिले है। एकर पाछू मुगल काल के समय तक पचराही बड़ महत्तम के वैपारिक ठिहा रहे होही, काबर के इहाँ ले मुगल काल के एक दर्जन सिक्का मिले है।

पचराही ह 11वीं-12वीं ईस्वी में शिल्प अउ वास्तुकला के बड़ महत्तम वाले सांस्कृतिक केन्द्र अउ बड़ वैपारिक ठउर रहिस है। मंदिर मूर्ति के छोड़े इहाँ आम अउ खास मनखे के बसाहट के अवशेष मिले है। सुरक्षा दीवार के भीतरी खास मनखे के रहे के ठउर के संग इहाँ ले सोन-चाँदी अउ तामा के सिक्का मिले है. जबके परकोटा के बाहिर आम नागरिक राहत रहिन होहीं, जिहाँ ले कुम्हार अउ लोहार मन के उपयोग के जिनिस के अवशेष अब्बड़ अकन मिले हे। इँहेच्च ले लइका मन के खेलौना, माटी के माला अउ रोज-रोज बउरे के जिनिस, जइसे लोहा, तामा के औजार अउ गाहना- गूठा मिले है।

पचराही परिक्षेत्र के क्रमांक 4 म पंचायतन शैली के संगे-संग राजपुरुष, उमा महेश्वर के बड़ सुग्घर मूर्ति मिले हैं।

पचराही क्षेत्र क्रमांक 5 म तीन परकोटा हे जउन ह खाल्हे के पखना के उपर लगभग 100 मीटर लंबा, 50 मीटर चाकर ईंटा के बने परदा आय। महल म उपर जाय बर बने सिढ़िया के अवशेष आजो देखब म आत हे।

पचराही म अभी तक 6 ठन मंदिर के अवशेष मिले है, जिहाँ ले सुग्घर- सुग्घर कलात्मक मूर्ति मिलत हैं। बकेला- हाँप नँदिया के ओ पार बकेला गाँव के टीला म जैन मूर्ति के शिल्प-खंड देखे जा सकत है, जेमा धर्मनाथ, शांतिनाथ अउ पार्श्वनाथ के खंडित मूर्ति माढे हे तीरेच म बावा डोंगरी नाव के ठउर म जैन मंदिर के दुवार साखा रखाय हे, जेखर मँझोत म महावीर स्वामी के मूर्ति है।

पचराही हमर छत्तीसगढ़ के पुरातत्व के गौरव आय। आज एकर सोर दुनिया भर म उड़त है। सरलग खोदइ ले अउ कतको जुन्ना जिनिस मिलही, अइसे लगथे।


अभ्यास


 पाठ से 

1. पचराही के नाँव परे के कारण बतावव।

उत्तर-

2. पचराही म मिले अवशेष मन के संबंध कोन कोन धरम ले हे?

उत्तर-

3. पचराही म मिले जीवाश्म के बारे में बतावद।

उत्तर-

4. कोन कोन ठउर ल छत्तीसगढ़ के कला-संस्कृति के अगासदिया केहे गे हे?

उत्तर-

5. पचराही के खोदई ले मिले जिनिस मन के सूची बनावव ।

उत्तर-

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